b2 स्पिरिट बम्बर दुनिया का ऐसा जहाज है

जिसे चाहकर भी कोई मिसाइल तबाह नहीं कर

सकता देखने में बेशक यह एक फुटबॉल फील्ड

जितना बड़ा लगता है लेकिन दुश्मन के रडार

पर यह सिर्फ और सिर्फ एक मक्खी जितना नजर

आता है चाहे कितना ही कॉम्प्लेक्स रडार

नेटवर्क क्यों ना हो बी टू स्पिरिट बमबर

के लिए इसे चकमा देना बाएं हाथ का खेल है

$ अरब डॉल की लागत से तैयार किया गया यह

आज तक बनाया गया दुनिया का सबसे महंगा

जहाज है दूसरे जेट्स के मुकाबले में ना

सिर्फ खामोश बल्कि यह हीट सीकिंग मिसाइल्स

के साथ-साथ इंफ्रारेड गाइडेड मिसाइल्स को

भी आसानी से धोखा दे सकता है एक ऐसा जहाज

जो चाहे तो दुनिया का नक्शा ही बदल सकता

है पर सोचने वाली बात यह है कि एक 52 मीटर

चौड़ा जहाज आखिर रेडार्स पर क्यों डिटेक्ट

नहीं होता इसमें ऐसी कौन सी साइंस है जिसे

अमेरिका पिछले 37 इयर्स से छुपा रहा है z

टीवी की वीडियोस में एक बार फिर से

खुशामदीद नाजरीन इस बी टू बम्बर को बनाने

के पीछे एक ऐसा वाक्या है जिसने दुनिया भर

में अमेरिका का सर शर्म से झुका दिया था

फर्स्ट मई 1961 पाकिस्तान में पेशावर

एयरबेस से अमेरिका का लॉक हीट यूट2

एयरक्राफ्ट टेक ऑफ करता है यह सीआईए के एक

सीक्रेट मिशन पर सोवियत यूनियन की जासूसी

करने जा रहा था यह कोल्ड वॉर का दौर था जब

अमेरिका और सोवियत यूनियन दोनों अपनी

टेक्नोलॉजी के जरिए एक दूसरे को नीचा

दिखाने की कोशिश कर रहे थे अमेरिका को

घमंड था कि उसका यू टू लॉक हीट स्पाई

प्लेन 81 फीट्स पर फ्लाई कर सकता है और

इतने हाई एलटीट्यूड पे कोई उसका कुछ नहीं

बिगाड़ सकता यूएस समझता था कि इतनी ऊंचाई

तक यूएसएसआर का कोई मिसाइल नहीं पहुंच

पाएगा पर जैसे ही यह जहाज सोवियत यूनियन

की टेरिटरी में घुसा तो रेडार ने फौरन उसे

डिटेक्ट कर लिया पहले तो उन्होंने कई

फाइटर जेट्स भेजे और कई मिसाइल्स लॉन्च

किए लेकिन वाकई इतनी ऊंचाई पर हिट करना

उनके बस में नहीं था लेकिन फिर सोवियत

यूनियन की मिलिट्री ने अपने S75 डिवीना

मिसाइल को प्लेन पे लॉक करके फायर कर दिया


इस मिसाइल के बारे में अमेरिका को भी पता

था लेकिन उनका ख्याल था कि सोवियत का S75

भी इतनी ऊंचाई तक नहीं पहुंच सकेगा पर

उसके बाद जो हुआ वो अमेरिका के वहमोगुमान

में भी नहीं था S75 ने 81,111 फीट्स पे

उड़ते हुए यू टू लॉक हीट को इंतहाई

परफेक्शन से हिट किया प्लेन वहां के यका

टेनिनबर्ग नामी शहर के ऊपर गिरा और पायलट

ने खुद को इजेक्ट कर लिया शुरुआत में

अमेरिका ने कहा कि यह नासा का वेदर रिसर्च

प्लेन था लेकिन जब सोवियत यूनियन ने

कैप्चर किए गए पायलट और U2 का सर्िलेंस

इक्विपमेंट दुनिया के सामने रखा तो

अमेरिका की पूरी दुनिया में बड़ी बदनामी

हुई इस वाक्य ने दोनों मुल्कों को ठीक-ठाक

सबक दिया इसके बाद रशिया यानी सोवियत

यूनियन ने अपने एयर डिफेंस पर काम करना

शुरू कर दिया और अमेरिका ने ऐसी

टेक्नोलॉजी पर जो रेडार के सामने लिटरली

इनविज़िबल हो जाए उस वक्त अमेरिका के पास

B52 बॉम्बर्स थे लेकिन इस वाक्य के बाद यह

बात कंफर्म हो गई कि रशियन टेरिटरी में

दाखिल होने से पहले ही इसे गिरा दिया

जाएगा यानी अमेरिका चाहकर भी अपने

न्यूक्लियर वेपंस रशिया के खिलाफ इस्तेमाल

नहीं कर सकता और फिर 1976 तक यूएसएसआर ने

ऐसे सरफेस टू एयर मिसाइल बनाए जो 111

कि.मी दूर तक भी एयरक्राफ्ट को गिराने की

सलाहियत रखते थे जिनमें S311 भी शामिल थे

इस वक्त यूएसएसआर का एयर डिफेंस इतना

स्ट्रांग हो गया कि अमेरिकन एयरफोर्स के

एक जनरल ने कहा कि सोवियत यूनियन में अपना

B52 बॉम्बर भेजना ऐसा ही है जैसे मक्खी के

छत्ते पर पत्थर मारना यही वो वक्त था जब

अमेरिका ने 1978 में एडवांस टेक्नोलॉजी

बॉम्बर यानी एटीबी प्रोग्राम लॉन्च किया

इस प्रोग्राम का मकसद एक ऐसा बमबर प्लेन

बनाना था जो सोवियत यूनियन की टेरिटरी में

जाए उनके रेडार्स के सामने बॉम्ब्स गिराए

और बिना नोटिस हुए वहां से निकल जाए

अमेरिका की यह तमाम रिक्वायरमेंट्स पूरी

की बी2 बमबर ने जिसकी पहली फ्लाइट 1989

में हुई लेकिन दुनिया को यह 1997 में

दिखाया गया B2 की सबसे बड़ी खासियत उसकी

रडार से बचने की सलाहियत है इस एयरक्राफ्ट

का एक-एक कोना ऐसे डिजाइन किया गया है कि

जब रेडार के सिग्नल्स इस पर पड़ते हैं तो

वह वापस रडार तक नहीं पहुंच पाते यानी उन

सिग्नल्स की डायरेक्शन बदल जाती है और इसी

वजह से इसके डिजाइन में सिर्फ विंग्स हैं

ना फ्यूज लार्ज और ना ही टेल नॉर्मल

एयरक्राफ्ट्स में लगी यह वर्टिकल टेल फिन

बड़ी आसानी से रेडार में डिटेक्ट हो जाती

है एयर डिफेंस सिस्टम में लगे रेडार्स का

बहुत बड़ा नेटवर्क आपस में कनेक्टेड होता

है और यह रेडार्स आसमान में हर तरफ ऐसे

सिग्नल्स भेजते हैं कि कोई एक कोना भी

अनडिटेक्टेड ना रह जाए यह सिग्नल्स

नॉर्मली प्लेन की बॉडी से रिफ्लेक्ट होकर

वापस रेडार की तरफ जाते हैं और ऐसे उसकी

मौजूदगी रेडार में रिकॉर्ड हो जाती है

खासकर टेल फिन को बचाना नामुमकिन होता है

क्योंकि यह साइड से दिखने पर रेडार्स के

लिए एक मिरर का काम करती है लेकिन बी टू

स्पिरिट बमबर की बॉडी ऐसे डिजाइन की गई है

कि कहीं से भी रेडार का सिग्नल आए तो वह

टकराने के बाद उसी डायरेक्शन में

रिफ्लेक्ट नहीं हो पाएगा और इसी वजह से

इसमें टेल रखी ही नहीं गई इसका जिगजैग

डिजाइन सिग्नल्स को बिल्कुल ऑपोजिट

डायरेक्शन में डिफ्लेक्ट कर देता है 


B2बमबर की कामयाबी के पीछे सिर्फ इसका डिज़

ही नहीं बल्कि एक ऐसी कोटिंग भी है जो

111% रेडार के सिग्नल्स को अपने अंदर

अब्सॉर्ब कर लेती है यूएस ने एक ऐसी

सीक्रेट कोटिंग बनाई है जिसकी डिटेल्स अभी

तक दुनिया से छुपी हुई हैं और इसी कोटिंग

की वजह से B2 बॉम्बर रेडार पर 111%

इनविज़िबल हो जाता है इसका रेडार क्रॉस

सेक्शन हैरतंगेज तौर पे सिर्फ

1.1111 स्क्वायर मीटर है यानी इसे डिटेक्ट

करने का मतलब है आसमान में किसी मक्खी को

डिटेक्ट करना कंपेयर किया जाए तो रडार पर

B52 बॉम्बर एक दो बेडरूम फ्लैट जितना नजर

आता है F15 एक छोटे कमरे जितना JF17 एक

सिंगल बेड जितना और राफेल एक बड़े तकिए

जितना नजर आता है यानी B2 बॉम्बर इन सबसे

11 गुना बड़ा होने के बावजूद रेडार पर

सिर्फ एक मक्खी जितना दिखता है एिएशन

सिक्योरिटी की दुनिया में इस टेक्नोलॉजी

को स्टेल्थ कहा जाता है और इसकी बुनियाद

बी2 बमबर से ही रखी गई B2 स्पिरिट बमबर

में सिर्फ दुश्मन के रडार से बचने की

काबिलियत ही नहीं बल्कि इसका लो हीट

सिग्नेचर इंफ्रारेड और हीट सीकिंग

मिसाइल्स को भी चकमा दे सकता है नॉर्मली

एयर डिफेंस सिस्टम्स में इंफ्रारेड

सर्लेंस सिस्टम्स भी होते हैं यह सिस्टम

जेट के पीछे से निकलने वाली हीट को

डिटेक्ट करके कंफर्म करते हैं और फिर

मिसाइल सिस्टम उसी हीट सिग्नेचर पर लॉक

किया जाता है लेकिन B2 बमबर के इंजन इसकी

बॉडी के अंदर छुपाए गए हैं जेट इंजन में

कंबस्शन होने के बाद गर्माइश डायरेक्टली

बाहर नहीं निकलती बल्कि पहले उसे बाहर की

ठंडी हवा के साथ मिक्स किया जाता है जिसकी

वजह से B2 बंपर अपने पीछे कोई हीट

सिग्नेचर नहीं छोड़ता और यही चीज B2 को

दुनिया का सबसे कम हीट सिग्नेचर छोड़ने

वाला एयरक्राफ्ट बनाती है यह ऐसा ही है कि

अगर एक F1 जेट इंफ्रारेड सर्वेलेंस

सिस्टम में 111 कि.मी दूर से डिटेक्ट हो

जाता है तो वहीं B2 बमबर जब तक 11 कि.मी

की रेंज में नहीं आएगा डिटेक्ट नहीं हो

पाएगा पर यह इतना नीचे उड़ता ही नहीं जो

कभी इंफ्रारेड रडार पर भी डिटेक्ट हो सके

बी टू बमबर हैरतंगेज तौर पर 15111 मीटर या

फिर 511 फीट्स पर उड़ने की काबिलियत रखता

है इतनी ऊंचाई पर उड़ने की वजह से यह ना

सिर्फ इंफ्रारेड रेडार से बच सकता है

बल्कि ऊपर एटमॉस्फियर पतला होने के बायस

जहाज पर ड्रैग कम पड़ता है और फ्यूल

एफिशिएंसी बेहतर हो जाती है जिसकी वजह से

यह और ज्यादा डिस्टेंस ट्रैवल कर सकता है

अपने फुल टैंक में बी टू बमबर 11,111

कि.मी का डिस्टेंस बड़ी आसानी से तय कर

सकता है अब यहां आपको लग रहा होगा कि इसका

रेडार और इंफ्रारेड सर्लेंस सिस्टम पर नजर

ना आना शायद यही इसकी खास बात है लेकिन

नहीं बी2 बमबर को असल स्टेल्थ बमबर बनाता

है इसका ईसीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर

मेजर्स B2 के अंदर हाईटेक ईसीएम सिस्टम्स

लगे हुए हैं जो पहले यह देखते हैं कि

दुश्मन के रेडार की क्या फ्रीक्वेंसी है

फिर उसी फ्रीक्वेंसी पर झूठे सिग्नल्स

भेजते हैं जिससे रेडार पर B2 की गलत

लोकेशन शो होती है या फिर 21 अलग-अलग

लोकेशनेशंस पर B2 नजर आने लगता है जबकि

असल में वह सिर्फ एक जगह ही होता है यह

सिस्टम रेडार के सिग्नल को रिकॉर्ड करता

है और उसे मॉडिफाई करके वापस भेज देता है

रेडार को लगता है कि यह सिग्नल जेन्युइन

है पर असल में वह झूठ होता है और सबसे मजे

की बात यह ईसीएम सिर्फ उसी रेडार को गलत

सिग्नल भेजता है जिसने उसे डिटेक्ट किया

हो ताकि दुश्मन को लगे कि शायद रेडार में

कोई नॉइज़ या एरर आया है अगर तमाम ही

रेडार्स में गलत सिग्नल भेजे जाएंगे तो

दुश्मन को शक हो सकता है बी2 बमबर की बॉडी

में ज्यादातर कार्बन ग्रेफाइट कंपोजिट

मटेरियल का इस्तेमाल हुआ है इस जहाज को

टुकड़ों में बनाया गया और फिर इस तरह

जोड़ा गया जैसे स्विस वॉच मेकर हर पुरजे

को पूरी परफेक्शन से जोड़ता है अब आते हैं

इसके पे लोड पर यह हैरानक तौर पे 18,111

केजी का बारूदी मवाद उठा सकता है यानी

करीब 15 गाड़ियों का लोड यह अपनी बेली के

अंदर 81 जे डैम्स छुपा सकता है जो कि

जीपीएस गाइडेड बॉम्ब्स होते हैं 


1 B83 न्यूक्लियर बॉम्ब्स और 1 एजीएम 158 जसम

मिसाइल्स जो कि स्टेल्थ क्रूज मिसाइल्स

होते हैं यह बॉम्ब्स B2 के इंटरनल बे के

अंदर फिट किए जाते हैं और दरवाजा बंद हो

जाता है ताकि फ्लाइट के दौरान स्टेल्थ

बरकरार रहे रेंज की बात की जाए तो यह

अमेरिका से रशिया जाकर वापस आ सकता है और

अगर हवा में ही रिफ्यूलिंग की जाए तो बी

टू बमबर दुनिया के किसी भी कोने तक जा

सकता है अफगानिस्तान वॉर के दौरान बी टू

बमबर ने यूएसए में मिजोरी एयरफोर्स बेस से

टेक ऑफ किया 9511 कि.मी का फासला तय करके

अफगानिस्तान में बॉम्बिंग्स की और बिना

लैंड किए वापस चला गया इस दौरान बीच में

सिर्फ एक मिड एयर रिफ्यूलिंग की जरूरत

पड़ी इस पूरे मिशन में बी टू बॉम्बर

लगातार 45 घंटों तक फ्लाई करता रहा और

किसी एक भी रडार पर यह नमूदार ना हो सका

इसके अलावा 1999 में ऑपरेशन अलाइड फोर्स

के दौरान भी इसे सर्बिया में बॉम्बिंग्स

के लिए इस्तेमाल किया गया 211 में ऑपरेशन

इराक फ्रीडम और 2111 में ऑपरेशन ओडसी डॉन

में भी बी2 ने लीबिया में बॉम्बिंग्स की

B2 स्पिरिट बम्बर किसी भी मौसम में और

किसी भी कंडीशन में फ्लाई कर सकता है बेशक

जीपीएस सेटेलाइट्स ही तबाह क्यों ना हो

जाए अपने बैकअप सिस्टम्स को इस्तेमाल करते

हुए यह स्टार्स को देखकर भी खुद उड़ता

रहता है इसमें लगे हाईटेक सुनार कैमरास बी

टू बमबर को दुनिया का सबसे बड़ा ऑबस्टिकल

अवॉयडेंस प्लेन बनाते हैं यह अपने आप

टेरेन को आइडेंटिफाई करके उसके हिसाब से

फ्लाई करता रहता है अब क्योंकि यह एक बहुत

बड़ा विंग है और इसमें कोई टेल रडर या

एलिवेटर नहीं होते तो इसकी स्टेबिलिटी

इतनी परफेक्ट नहीं है कि पायलट इसे बिना

कंप्यूटर की मदद के उड़ा सके इसमें लगा है

दुनिया का सबसे कॉम्प्लेक्स कंप्यूटर

सिस्टम जो हर वक्त इसकी रोल और पिच

मूवमेंट को एडजस्ट कर रहा होता है पायलट

सिर्फ कंप्यूटर को कमांड देता है कि टर्न

करना है उसके बाद कंप्यूटर खुद ही जहाज को

पायलट की जरूरत के मुताबिक टर्न करता है

अब जाहिर है इतना एडवांस्ड और दुनिया का

सबसे सिक्यर्ड प्लेन काफी महंगा भी होगा

आज तक सिर्फ 21 बी2 बम्स ही तैयार किए गए

हैं और सिर्फ एक जहाज $ अरब डॉल की लागत

से तैयार किया गया है यानी काफी कंट्रीज

की जीडीपीस बी2 बमबर की कीमत से कम है यह

सारे जहाज सिर्फ अमेरिका के पास हैं और

अभी तक अमेरिका का यह टेक्नोलॉजी बेचने का

कोई इरादा नहीं है इसके अलावा फ्यूल की

भूख ऐसी कि सिर्फ 1 घंटे में यह $.5 लाख

का फ्यूल पी जाता है वहीं एक नॉर्मल

कमर्शियल जेट 1 घंटे में $11 का फ्यूल

पीता है बी टू बम्बर की मेंटेनेंस भी किसी

आम जहाज से बहुत अलग है हर फ्लाइट के बाद

पूरे जहाज को सॉफ्ट वॉश किया जाता है और

इस पर दोबारा से सीक्रेट स्टेल्थ कोटिंग

की जाती है पूरी बॉडी के हर कोने का चेकअप

होता है कि कहीं कोई छोटा सा भी सुराख या

डेंट तो नहीं है क्योंकि अगर इसकी बॉडी

में एक मच्छर जितना भी डेंट पड़ गया तो यह

अपनी स्टेल्थ बरकरार रखने की काबिलियत खो

सकता है उम्मीद है ZM टीवी की यह वीडियो

भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे आप

लोगों के प्यार भरे कमेंट्स का बेहद

शुक्रिया मिलते हैं अगली शानदार वीडियो

में

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