सौतेली मां कोमल टमाटर सुशीला गोलू

विमला की मौत अपने बेटे गोलू को जन्म देने के कुछ दिन बाद ही हो गई     उसके जाने के बाद   उसकी 8 साल की बेटी कोमल ने ही    अपने भाई बबलू का ध्यान रखा


उसके बाबा ने साल भर बाद ही दूसरी शादी कर ली     लेकिन उसकी सौतेली मां को वो दोनों फुटी आंख नहीं भाते थे 



8 साल की कोमल  सारा दिन भूखी प्यासी अपने 2 साल के भाई को गोद में लिए और सर पर टमाटर टोकरी उठाये

टमाटर बेचा करती थी 

फिर शाम को जब वो घर आती तो सारे पैसे उसकी सौतेली मां उसे छीन लेती


 ऐसे ही एक रोज 




अरे इसमें तो ₹10 कम है बाकी के पैसे कहां है




मां वो बबलू को बहुत जोरों की भूख लगी थी

 इसलिए मैंने उसे ₹10 का खाना खिला दिया 




क्या

 तूने मेरे इन पैसों से     भूखे नंगी को खाना खिला दिया




रुक     अभी मैं    तुझे अभी बताती हूं




सुशीला उसकी खूब पिटाई करती है    फिर बबलू को गोद में उठाकर बड़बड़ाती हुई घर से निकल जाती है



आज तो मैं इस बिमारी को सदा सदा के लिए खत्म कर दुगी    फिर देखती हूं इस कोमल का काम में मन क्यों नहीं लगेगा 

और ये मेरे पैसे   इस पर ही लुटाती रहेगी



इतना कहकर सुशीला बबलू को उठाएं नदी की तरफ जा रही  होती है उसके पीछे भागती  हुई कोमल   लगातार रोते हुए अपनी सौतेली मां से कह रही थी




नहीं मां छोड़ दो उसे

 बबलू अभी बच्चा है नहीं मां




लेकिन सुशीला उसकी एक नहीं सुनती और बबलू को नदी में फेंक देती है





चल अब घर 

तेरा भाई तो परलोक सुधार गया 

मेरा बस चलता तो मैं भी तुझे खत्म कर देती 

लेकिन नहीं अगर मैंने ऐसा किया तो घर का काम कौन करेगा




सुशीला उसे घर घसीटते हुए     घर ले आती है    कोमल अपने पिता को आकर सारी बात बताती है





 अरे तो अच्छा ही हुआ ना मर गया

 तू  क्यों हमारी छाती पर बैठी है 

तू भी उसके साथ ही मर जाती तो अच्छा होता है




उधर बबलू बहता हुआ नदी के किनारे आकर बेहोश पड़ा हुआ होता है


 उसी नदी के किनारे से एक विधवा औरत गुजर रही थी  फिर उसकी नजर उस बच्चे पर गई 


जो नदी के किनारे बेहोश पड़ा हुआ था


 उस बच्चे को देखकर जट से वो उसे उठाती हैं और सीने से लगा लेती है 


दरअसल सुमन भांज थी उसकी कोई  ओलाद नहीं थी




मेरा बच्चा   लगता किसी पापी ने नदी में बहा दिया





सुमन बबलू को उठाकर जट से डॉक्टर के पास ले गई 

जहां  डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगाया 

और कुछ देर बाद उसे होश आ गया 

सुमन उसकी देखभाल करके अब  अपने बच्चों की तरह पालन पोषण करने लगी

 सुमन शहर में टेलरिंग का काम करती थी 



उधर कोमल का रो रो कर बुरा हाल था   ऐसे ही समय बिता

 अब दोनों भाई बहन बड़े हो गए 

उधर सुमन एक बड़ी फैशन डिजाइनर बन चुकी थी 

जब भी राखी और भाईदूज  जाता तो अक्सर बबलू को सपना आता    कि उसकी बहन उसे राखी और तिलक करने आ रही है 

 तभी बबलू को कोई धक्का दे देता है  और वो नदी में गिर जाता है






 कोमल  कोमल मेरी बहन



ये कहकर बबलू जाग जाता तो वहीं कोमल भी टमाटर की खेती करके बाजार में बेचती 

और उसे जो पैसे मिलते   वो सौतेली मां   उसे ले लेती   

एक रोज कोमल अपनी सौतेली मां से




ये लो मां आज की कमाई 

अब मां देखो ना सुट जगह जगह से फट रहा है  आप मुझे नया सुट दिलादो ना 



नया सुट मजाक है क्या

 पैसे क्या पेड़ पर उगते हैं

 सुट तो तुझे साल में सिर्फ दिवाली पर मिलता है 

और अगली दिवाली पर ही मिलेगा समझी



लेकिन तब तक मैं ये फटा हुआ सुट पहनकर कैसे रहुंगी मां




वो मुझे नहीं पता 

 अब जा 

यहां घर के काम पर

 मैं चली आराम करने 





कोमल वहीं  फटे हुए कपड़े पहन कर बाजार टमाटर बेचने जाने लगी 

उसे फटे हुए सूट में देखकर लड़के उसे छेड़ने लगे 




ओहो क्या मस्त डिजाइन है सुट का

 अह  एक दम पटाका लग रही है एक दम पटाका




रात को कोमल वहीं  बात सोच सोचकर परेशान हो रही थी तभी

उसकी नजर अपने सामने रखे टमाटर और सिलाई मशीन पर गई 

उसने उस टमाटर को सिलचर अपने लिए टमाटर का एक सुंदर सा गाउन बनाकर तैयार किया 

और अगले दिन वो  टमाटर वाली ड्रेस पहनकर बाजार में टमाटर बेचने लगी

 तभी वहां टमाटर खरीदने आई सूमन की नजर    टमाटर वाली ड्रेस पर गई 



अरे वा टमाटर वाला गाउन   ये तो बहुत ही सुन्दर है   ये तुमने कहा से लिया






इसे मैंने बनाया है




क्या तुमने   वा तुम तो बहुत ही अच्छी डिजाइनर हो   

फिर तुम तो मेरे साथ चलो  

मेरे पास तुम्हारे लिए बहुत अच्छी नौकरी है

 मेरा खुद का कपड़ों का शोरूम है 

तुम कपड़े डिजाइन करना 

और मैं तुम्हे ₹30 हजार हर महीने तनख्वाह दूंगी 



ये सुनकर कोमल बहुत खुश हुई   और वो सूमन के  साथ उसके घर चली गई

 जहां बबलू सो रहा था लेकिन अचानक से वो कोमल  दीदी कहते हुए जोर से चिल्ला कर जाग गया 




मेरे बेटे तूने फिर वही सपना देखा क्या




अप हां मां

कैसा सपना




फिर उन्होंने सपने के बारे में बताया




क्या नदी में   बबलू तू कहीं कोमल का भाई तो नहीं है




कोमल   बबलू हां ये ही नाम सपने में सुनता हूं




फिर कोमल के हाथ पर वो निसान देखती है जैसा निसान उसके हाथ पर था




तू मेरा भाई बबलू है जिसे बचपन में सौतेली मां ने नदी में फेंक दिया था




हां ये मुझे नदी के किनारे बेहोश पड़ा हुआ  मिला था




कोमल ने उन्हें सारी बात बताई   उसे अपना भाई मिल गया 

सुमन ने दोनों भाई बहन अपना लिया 

वो दोनों भी उसे अपनी मां की तरह प्यार करने लगे 

फिर दोनों ने मिलकर सौतेली मां पिता को जेल में डलवा दिया

 कोमल के अब  बुरे दिन भी खत्म हो गए

 अब वो  खुशी खुशी अपने भाई और बहन   सूमन के साथ रहने लगी



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